जोधपुर, 8 सितंबर 2026: राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, जोधपुर (NLUJ) द्वारा Caregivers Asha Society (CAS) तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय के सहयोग से “भारत में देखभाल एवं दीर्घकालिक देखभाल कानून: देखभाल के लिए एक विधिक ढाँचे की ओर” विषय पर अंतरराष्ट्रीय हितधारक परामर्श का आयोजन 8 से 10 सितंबर 2026 तक राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, जोधपुर, राजस्थान में किया जा रहा है।
तीन दिवसीय यह परामर्श भारत में देखभाल एवं दीर्घकालिक देखभाल के लिए एक व्यापक और समावेशी विधिक ढाँचे की आवश्यकता पर विचार-विमर्श के लिए विधि, स्वास्थ्य सेवा, नीति, सामाजिक कल्याण और देखभाल के क्षेत्र से जुड़े विभिन्न हितधारकों को एक मंच पर लाएगा। यह परामर्श विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों, स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों, देखभालकर्ताओं तथा अन्य संबंधित हितधारकों के बीच देखभाल से जुड़े उभरते विधिक एवं नीतिगत पहलुओं पर सार्थक संवाद का अवसर प्रदान करेगा।
परामर्श के दौरान चार प्रमुख विषयों पर विशेष रूप से विचार-विमर्श किया जाएगा: देखभालकर्ताओं की मान्यता के लिए विधिक ढाँचा एवं मौजूदा कमियाँ; भारत में स्वास्थ्य प्रणालियाँ एवं देखभाल की वास्तविकताएँ; देखभाल की आर्थिक एवं सामाजिक वास्तविकताएँ; तथा नीतिगत सुधार, प्रौद्योगिकी एवं देखभाल शासन का भविष्य।
यह कार्यक्रम प्रो. (डॉ.) हरप्रीत कौर, माननीय कुलपति, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, जोधपुर, की अध्यक्षता में तथा डॉ. अरविंद माथुर, अध्यक्ष, Caregivers Asha Society, श्री ह्योबुम जेन (Dr. Hyobum Jang), Technical Officer for Ageing, WHO Headquarters, Geneva, एवं डॉ. अमृता कंसल (Dr. Amrita Kansal), Technical Officer, Healthy Ageing, WHO, Geneva, के संरक्षण में आयोजित किया जा रहा है।
इस अवसर पर कुलगुरु , प्रो. (डॉ.) हरप्रीत कौर, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, जोधपुर ने विश्वविद्यालय समुदाय का परिचय देते हुए NLUJ की शैक्षणिक यात्रा, उपलब्धियों एवं विभिन्न अकादमिक पहलों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा विधि शिक्षा, अनुसंधान एवं अंतर्विषयक संवाद के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि NLUJ समकालीन सामाजिक चुनौतियों पर सार्थक विमर्श को बढ़ावा देने तथा समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
इस अवसर पर Caregivers Asha Society के अध्यक्ष, डॉ. अरविंद माथुर ने कहा कि देखभाल को केवल परिवार की अदृश्य जिम्मेदारी के रूप में नहीं, बल्कि स्वास्थ्य एवं सामाजिक देखभाल व्यवस्था के एक महत्वपूर्ण अंग के रूप में मान्यता मिलनी चाहिए। उन्होंने परिवार के देखभालकर्ताओं को आवश्यक सहयोग, संरक्षण और सम्मान प्रदान करने के लिए प्रभावी विधिक एवं नीतिगत ढाँचे की आवश्यकता पर बल दिया।
भारत में बदलती देखभाल संबंधी आवश्यकताओं और स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण तथा मानवीय गरिमा के अभिन्न अंग के रूप में देखभाल को मान्यता देने की बढ़ती आवश्यकता के संदर्भ में यह परामर्श विशेष महत्व रखता है। विचार-विमर्श के दौरान देखभालकर्ताओं की विधिक मान्यता एवं संस्थागत सहयोग से संबंधित मौजूदा कमियों का परीक्षण किया जाएगा तथा दीर्घकालिक देखभाल के लिए अधिकार-आधारित, समानतापूर्ण और सतत ढाँचे के निर्माण की संभावित दिशाओं पर चर्चा की जाएगी।
तीन दिवसीय यह अंतरराष्ट्रीय परामर्श भारत में देखभाल एवं दीर्घकालिक देखभाल से संबंधित विधिक एवं नीतिगत ढाँचों को सुदृढ़ करने के लिए कार्रवाई योग्य सुझाव एवं अनुशंसाएँ विकसित करने का प्रयास करेगा। इसका उद्देश्य कानून, नीति और सहयोग के माध्यम से एक अधिक समावेशी एवं संवेदनशील समाज के निर्माण की दिशा में योगदान देना है।